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Wednesday, January 11, 2012

लेन देन

लेन-देन की पद्धति सनातन से चली आ रही है। उपकृत होकर खुशी से हम आप इस प्रक्रिया से जुड़े हैं।

आज के संदर्भ में मीडिया ने अन्‍ना हजारे को मीडिया चाहे टीवी हो, चाहे अखबार समूह हो, उनके साथ उनके विभिन्‍न स्‍तर के प्रवक्‍ता हों, अन्‍ना को गांधी का दर्जा बेहिचक दे दिया है।

इसी संदर्भ में एक घटना की बात करना चाहता हूं। विगत दिनों गांव में मेरे दरवाजे पर सालाना जमीन संबंधी रसीद काटने तहसीलदार आये थे। वे अपना सहायक लेकर चलते हैं।

उनके सहायक ने रसीद काट दी। रसीद की रकम कुल जितने भी आये थे। उसमें अपना तहरीर (ऊपरी रकम 500 रु.) जोड़कर बताई थी। मेरे बेटा ने एतराज किया। इस पर उनका तेवर तुरंत बदल गया। उनपर अन्‍ना का कोई असर नहीं पड़ा।

समाज में अभी प्रखंड कार्यालय में लेन-देन चल रहा है। मैंने हस्‍तक्षेप किया। बेटा को कहा 200 रु. दे दें। बेटा ने मान लिया।

Tuesday, December 13, 2011

प्रलय प्रवाह

उधर रूस के जंगलों में लगी आग

थमती नहीं फैलती गई

पाकिस्‍तान की सीमा सरहद

बाढ़ में डूबती गयी

गांव शहर की रिहायसी नगरी

चपेट में लेते हुए

सिंध तक पहुंच गई

रिहंद बांध टूटने के कगार पर

× × ×

उधर कश्‍मीर के लेह में

बादल का फटना

जान माल की क्षति

सैकड़ों सेना के जवान

मिट्टी में दब गए

चीन में तबाही

ग्रीन लैंड क्षेत्र का कटकर

खिसकना!

क्‍या होगा? खण्‍ड प्रलय!

कामायनी की वह पंक्ति

हिम गिरि के उतंग शिखर पर

बैठा शिला की शीतल छांव

एक पुरूष भींगे नयनों से

देख रहा था

प्रलय प्रवाह।

Wednesday, November 18, 2009

इधर

यहां तक
पहुंचते गये
अब क्‍या चाहते हो
दुनिया मुट्ठी में
करने की ख्‍वाहिश
तुम्‍हारी जाती नहीं
X X X

तुम्‍हारे डग
नहीं उठते
सीढ़ियां नहीं चढ़ पाते
सहारा ढूंढ़ते हो
एक अदद कोई
पोता, पोती, बहू
बेटा, बेटी की, मिल जाती है
निहाल हो जाते हो

Monday, November 9, 2009

31 अगस्‍त, 08

वह घड़ी - वह दृश्‍य
घर का बिलखना - क्‍या हो रहा है!
पहले बाबा का बेटा,
फिर बड़ी बहू,
अम्‍मां तुम भी,
क्‍यों जा रही हो?
पूजा घर में दीया
कौन जलाएगा!
फिर बाबा तुम भी,
तुम्‍हारे बिना मेरा
क्‍या होगा?
पास में खड़ा,
आम ने कहा
घबराओ मत
मैं हूं न
दोनों संग-संग
रहेंगे।

Tuesday, November 3, 2009

प्रधानमंत्री के प्रति

प्रधानमंत्री के प्रति

ओपन हर्ट सर्जरी पर
धन्‍यवाद किसे दूं!
पहला धन्‍यवाद भगवान को दूं
दूसरा धन्‍यवाद डॉक्‍टरों की टीम को
तेरह घंटों में सफल
सर्जरी पर
तीसरा धन्‍यवाद एम्‍स को
चौथा धन्‍यवाद प्रधानमंत्री, मनमोहन सिंह को
पांचवां धन्‍यवाद उनके परिवार जनों को
छठा धन्‍यवाद भारत को
सातवां धन्‍यवाद सारे लोगों को
जिनकी निगाहें
उन पर टिकी थीं।

Thursday, April 16, 2009

गरमी

उधर अस्त होता सूरज
क्षितिज में गोटा लगता
इधर पेड़-पौधे
निस्पंद मौन
एक पत्ता भी नहीं हिलता
* *
जेठ की पूर्णिमा
पूरब की दिशा में चाँद
क्षितिज से उठता
अपने मौज में।
* *
कैसी उमस
जान लेवा गरमी
बदन पसीना से तरबतर
भीगी गंजी निचोड़ा
* *
सिर फट रहा है
बिजली गुल
जायें तो जाएँ कहाँ
नहाने का मन हुआ
नहाया जी भर
लेकिन थोड़ी ही देर में
फिर वही गरमी
वही उमस
बिजली का खस्ताहाल!
परेशां मन कहीं नहीं चैन!

Tuesday, April 14, 2009

चेहरा

बाल सफ़ेद

मुंह में दांत नहीं

गाल पिचका -पिचका

आँखें कोटर में

धंसी-धंसी

झुर्रियां काया की

अजीबोगरीब-सी

डील-डौल

कद-काठी

बतलाती है

कभी इमारत

बुलंद थी

* * *

अतीत का पन्ना पलटो

यह वही चेहरा है

घुंघराले बाल

चंचल आँखें

छलकता प्यार

वाणी में मिश्री का घोल

गदरायी काया उन्नत उरोज

चाल गजगामिनी

सदाबहार

उसे देखते रहने का मन करता था

तो आज उस चेहरे के अतीत में झांको

सब्र-संतोष करो

चेहरा बदलता है आदमी का

दिल नहीं बदलता

Monday, March 30, 2009

नया विहान

आगे पीछे
जाना है
सब को
क्या करेंगे ?
धराधाम पर
जब तक हैं
लुटाते चलें
स्नेह, प्रेम
सद्भावना
निःस्वार्थ सेवा
करते रहें
बिना मुंह वालों को
बोलना सिखावें
चलना सिखावें
कर्मठ बनावें
मुंहताज बनकर
वे न जियें
धोखा न खायें
जैसा होता रहा है।
आगे दोहन न हो।
बहुत हुआ।
इंतजार करें
स्वर्णिम विहान का
देहरी पर।

Friday, March 20, 2009

मुंबई के काले कबूतर

आकाश से बातें करती चैदह माला की धीरज रेसीडेंसी चार खंडों में फैली है। हर लोर पर चार लैट हैं। हर माला पर खिड़िकियां हैं] छज्जे हैं। सामने का वेनस दस माला में सिमटा है। दोनों पर काले कबूतरों का बसेरा अजीबोगरीब-सा लगता है। साफ होते ही आसपास की खिड़कियों पर बैठे कबूतरों की इन हरकतों पर शायद ही कोई तवज्जो देता हो! आमन-सामने की खिड़कियों पर कबूतरों का आना-जाना] लड़ना-झगड़ना चालू हो जाता है। फिर हर दिन सांझ होते ही ये कबूतर जहां-तहां] जैसे-तैसे हर माला की खिड़कियों] छज्जों पर पनाह ले लेते हैं। रात में इनकी हरकतें नहीं होतीं। इन पर कोई अटैक भी नहीं होता। खिड़कियों पर रखे हुए ए. सी. की अग-बगल इनके पलते छोटे बच्चों को आसानी से पकड़ा जा सकता है। किन्तु ऐसा यहां पसंद नहीं है। अतः उड़न्तू होते ही उन बच्चों के मां-बाप उसे भगा दिया करते हैं। इसका चश्मदीद गवाह मैं खुद हूं। जिस कमरे में रहता हूं। वहां दो जोड़ी कबूतरों को उड़ते देखा है।

ये कबूतर दाना-पानी के लिए यहां नहीं उतरते। यहां ये रह तो लेते हैं] ठीक वैसे ही जैसे फुटपाथ पर गुजर करने वाले सर्वहारा वर्ग। समूह में ये दाना-पानी के लिए चले जाते हैं जिसका इन्हें पता होता है। सुना है] मुंबई में कहीं-कहीं इन कबूतरों के लिए] आगार बनाये गए हैं। खुले स्थलों पर ऐसे लोग भी हैं जो पर्याप्त मात्रा में दाना छिड़क कर आगे बढ़ जाते हैं। इण्डिया गेट के पास] ताज के सामने काले कबूतर ऐसे दीख पड़ते हैं] जैसे काली चादर बिछी हुई है।

वेनस और धीरज के बीच खुला आकाश है। उसी के बीच समूह में वे तब भागते हैं जब यदा-कदा चिल्ह आकर मंडराने लगता है। चिल्ह शिकार की तलाश में आता है] उनके पीछे-पीछे कौअे भी आ जाते हैं] उन अंडों और छोटे बच्चों को अपने लोल में लेकर भागते हैं। वहीं चिल्ह उन छोटे बच्चों और ठिकानों पर चोट करता है और शिकार को चंगुल में लेकर भाग जाता है।

काले कौअे समूह में सुबह-सुबह खिड़कियों पर चोट करते हैं। कबूतरों के साथ जंग छिड़ जाता है। कबूतर घोघ फुलाकर नाचते हैं और अपनी आवाज में कहते हैं भागो भागो। कौअे भाग जाते हैं। किन्तु जब इकट्ठे निकलते हैं कबूतर] तो अंडा या बिलकुल छोटा बच्चा इनका लेकर कौअे भाग जाते हैं। गनीमत है, इन कबूतरों को बर्ड लू नहीं होता] वैसा होता तो लैटों में रहनेवालों का हश्र क्या होता\ मुंबई के गगनचुम्बी अट्टालिकाओं को देखें। काले कबूतर मिल जायेंगे। इन कंक्रीट के जंगलों में ही तो काले कबूतरों का बसेरा है।

Saturday, February 14, 2009

तनाव

आजकल तनाव मुक्त कोई नहीं है। चाहे वह पढऩेवाला विद्यार्थी हो। काम करने वाले लोग हों। टैक्सी ड्राइवर हो या घर की गृहिणी हों। तनाव का कोई खास नुस्खा नहीं दिया जा सकता।

पर परिवार के बीच आपसी प्यार, सम्मान, आदर भाव बना हुआ है तो तनाव से बचा जा सकता है। बच्चे जब स्कूल जा रहे हों, तो उन्हें प्यार से स्कूल के लिए विदा करें। उसके स्कूल से लौटने के समय औवल उसके दादा-दादी इंतजार में खड़े रहें तो उसे ज्यादा खुशी मिलती है। उसका बस्ता आप ले लें। वह उछलता-कूदता घर आवे। फिर यदि आप दोनों ही कार्यरत हैं, तो यह ध्यान रखें। आप दोनों में जो कोई पहले घर आवे किचन का रोजमर्रा का काम कुछ हल्का बनाकर रखें। मसलन सब्जी काटकर रखें। दाल चढ़ा दें।

यदि आपके साथ माता-पिता हैं, तो उनके साथ प्रेम और आदर का भाव रखें। संभव हो तो उनके पास बैठें। उनका पांव दबा दिया करें। वे निहाल हो जायेंगे। उनका रोम-रोम पुलकित हो उठेगा और उनका आशीष आपके जीवन को तनाव मुक्त बना देगा। सोने के समय उनकी मच्छरदानी लगा दिया करें। यदि थूक खंखार फेंकने की उनकी आदत बनी हुई है, तो पिकदानी उनके पास रख दिया करें।

दिन में इकट्ठे भोजन करने का अवसर नहीं मिल सकता है। पर रात में इकट्ठा बैठकर भोजन करें। भोजन आपके आगे जो आये, उसे प्रसाद मानकर भोजन करें। कुछ खास आइटम की प्रशंसा कर दें। पकानेवाले को खुशी होगी।

इन दिनों बच्चा, बूढ़ा, जवान सभी अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग हो गए हैं। स्वस्थ रहने के लिए योगा, ध्यान, शिथिलासन और शवासन करें। यदि आपको ब्लड प्रेशर है, कहीं वाद-विवाद में नहीं फंसे। ये कुछ मामूल बातें हैं जिनसे आप तनाव मुक्त रह सकते हैं।

Wednesday, December 31, 2008

मेरा संदेश

2009 के दौरान
हमारा आपका रिश्ता
नया-नया रिश्ता
बरकरार रहे
प्रगाढ़ होता चले
यही शुभकामना है

Sunday, October 12, 2008

कोसी की बाढ़:छठा दिन

छठा दिन
एलार्म के पूर्व नींद टूट गई। जगा पड़ा रहा। एलार्म बजने पर उठा। शौच से निवृत, ध्यान के पूर्व देव दर्शन प्रार्थना। ध्यान जमता नहीं। आधा घंटा बी बी सी सुनने के साथ व्यायाम। आगे न्यूज सुना प्रादेशिक। स्नान-पूजा,दीवान (जाप)पर शंख बजाया पूजा घर में। सत्तू का जलपान। सवेरे पानी निकल गया। दोपहर बाद बढ़ता दीखा। सायकिल बेंच पर रखने को कहा, नहीं रखा गया। आज अशोक बोल रहे थे, सब कुछ अलग काम बाबूजी ने किया। कोई जवाब नहीं दिया। वाइफ भी बोलती हैं। सारा ठिकरा मेरे सिर फोड़ा जा रहा है। 1985 की डायरी की मुख्य बातें नोट किया।
फिर पानी का बढऩा। भय-दहशत बरकरार। मेरी एक बात सुनी नहीं जाती।
शाम को घंटा भर सिर्फ गायत्री जाप माला किया - अपराह्न की बेला 2:30 का न्यूज नहीं लगा।
शाम को बी बी सी लगा। राजनीतिक घटनाचक्र का सारांश अच्छा। काफी जानकारियां रहती हैं।

Saturday, October 11, 2008

कोसी की बाढ़:पांचवां दिन

पांचवां दिन
ओम नम: शिवाय की ध्वनि पांच बार। उसके पहले ही उठ बैठा। पूजा घर जाकर प्रणाम किया। और मुंह धोकर आ गया,किशमिश खाया अपने हिस्से का,फिर राष्ट्रीय प्रसारण घंटा भर सुनता रहा। न्यूज सुनकर बंद किया।
बी बी सी लग गया। उसके साथ कसरत और योगा समाप्त किया, फिर जलपान। स्वाध्याय अखंड ज्योति से,पुरानी डायरियां निकालीं। तोषी को पहुंचाने कलकता गया था। दुल्हिन और पत्नी साथ थीं।
फिर तोषी को मुंबई पहली बार पहुंचाने गया। उस प्रवास की कहानी मझधार में,त्रासदी से ही।
आज दोपहर में देह में धूप लगाने गया। राम जी बाबू अपने परिवार के बेटों के साथ बहस में थे। बेटों का दवाब था, अन्यत्र जाने का। रामजी बाबू का कहना, जीना-मरना यहीं है। वाईफ ने कहा, बी डी ओ इसी रास्ते निकले थे।
सुनील ने घर के उत्तर तरफ देखा। खतरा भांपा। नहाकर चला गया, अपने घर ।
अनिल का कमांडर को लिखा पत्र दिखाया। उसने संदेश से भेजवाई, पर वह उनके पास तक पहुंच नहीं सका। किसी ने कहा, हम खुद आफत में हैं।
समय से चाय और भोजन मिल जाता है। वाइफ का मेरी बात सुनकर तुरंत प्रतिक्रिया व्यक्त करती हैं। उनका कहना ठीक है। मुझे चुप रहना चाहिए। मैं भी वैसा ही महसूस करता हूं।
कुछ लोगों को ,राम चन्दर और हीरा का परिवार चला गया। मन में आशंका लिए कि घर जाएगा। मैं शाम को सुंदर वातावरण के लिए गायत्री जाप का सहारा ले रहा हूं। ऊपर वेला मन भयभीत था,पर रात भी चैन से सोया। घर के कमरों का पानी घटता-बढ़ता रहा।

Wednesday, October 8, 2008

कोसी की बाढ़:चौथा दिन

चौथा दिन
एलार्म बजते ही बिस्तर छोड़ा। यों घर का पानी निकलते देख खुशी हुई। पर पानी का वेग पूरब में देख कर, वह भी पोर्टिको से जो पास कर रहा है, उससे भयभीत मेरे मन ने अशोक को आगाह किया, घर गिर सकता है। तो उनका कहना हुआ अशुभ मुंह से क्यों निकालते हैं।
कल जो पत्र बी डी ओ को देना चाहता था,उसे आज सुशील के मार्फत पूर्वाह्न में भिजवाया। पर अभी तक उनके दिलो दिमाग पर कोई असर नहीं हुआ। उन्हें एक पदाधिकारी के नाते त्वरित एक्शन का सुझाव देना चाहिए था। स्थलीय जांच भी कर सकते थे।
रामजी बाबू ने इसकी गंभीरता को समझा तो पोर्टिको की स्थिति, फिर घर के उत्तर की दीवार की नींव की स्थिति को देखते हुए, कुछ ईंटें डाली गईं।
अशोक जी ने पानी खतम होने पर चारों तरफ किनारे-किनारे बोल्डर बिठाने को कहा। मन ही मन में मैंने कहा, कब तक ये वैशाखी पर रहेंगे।
घर बच गया, हम बच गए तो सावधानियां बरती जानी चाहिए। यों नवंबर के पहले जाने की बात पत्नी कर रही है। 30 सितंबर से नवरात्र शुरू हो रहा है। 10 अक्टूबर के बाद जैसी स्थिति रही कुछ दिन पटना में रहकर मुंबई चले जायेंगे।
आज उपरी वेला हेलीकप्टर से कुछ पैकेट जहां-तहां गिराये गए। कुछ को मिला, कुछ को नहीं। चला गया। विन्देश्वरी का परिवार भी चला गया। विन्देश्वरी के दामाद से बातें हुईं।
कुछ लोग छत पर और कुछ लोग नीचे सोये। मैं भी पेशाब करने उठता रहा। नींद आई।

Tuesday, September 30, 2008

कोसी की बाढ़:तीसरा दिन

तीसरा दिन
ओम नम: शिवाय पांच बार सुनते ही उठ बैठा। आज का समय ध्यान, मंत्र जाप, पूजा घर जाकर प्रणाम। फिर मंत्र जाप घड़ी से।़ मुंह धोकर किशमिश का आहार लिया, दुलहिन को चूड़ा-चीनी मांगा। पर्याप्त मिला। छत पर गया। रोड का जायजा लिया। खेड़वार परिवार दक्खिन वाले रोड पर सत्यनारायण मुखिया। नेता देवू ,सभी अपने-अपने घरों में। रोड पर नेता के नेता खोज खबर के लिए नहीं निकले। रामजी बाबू का परिवार। हीरा। रामचन्द्र। विन्देश्वरी । बचू का परिवार। तुलसी मां की बेटी। मेरे यहां है। अरुण एक दिन के लिए। नेता जी के यहां गए।
घर के अंदर पानी कम हुआ है। पर अभी तक हटा नहीं है। बाहर पानी के आने का वेग उत्तर से जारी है। पोर्टिको के भीतर का पानी किचन की ओर मुड़ कर पश्चिम जा रहा। प्रांगण में ईंट से पूरब उत्तर से दक्खिन की ओर पानी का प्रवाह जारी है। दिन में तीन रोटियां सब्जी के साथ खा लीं।
राम चन्दर ने वीरपुर का हालचाल सुनाया। सुशील ने भी शहर कुछ खबर की सुनाई।
नई किताब के लिए प्रारूप तैयार किया।
अंधेरा होने के औपचारिक शुद्धि कर के संध्या का निर्धारित जाप संपन्न। शाम के पहले रात का भोजन तीन रोटियां, सब्जी, फिर बी बी सी पर आपकी बात। और एक कोई संस्था के बारे में विस्तार से कहा गया पुरानी बातों का हवाला इतिहास कहते हुए, आज की पीढ़ी को उसकी याद दिला कर सिर्फ जानकारी देने की बात होने, अपनाने का आग्रह है।
रात कई बार पेशाब करने उठा। शाम को ग्रिल पकड़ कर शौच किया। किशमिश वाइफ ने नहीं खाया। मैंने खा लिया। फिर सेव एक हम और किसू ने आधा-आधा खाया। एलार्म बजने पर बिस्तर छोड़ा। इनवरटर की शक्ति खत्म, लालटेन की रोशनी में ...

Sunday, September 28, 2008

कोसी की बाढ़:दूसरा दिन

दूसरा दिन
सुबह हुई। रात की सांस। पिछली घड़ी से भारी बरसा। बिना नहाये सुबह का मंत्र जाप। योगा - व्यायाम बी बी सी सुन नहीं पाया। समाचार कुछ,कुछ बिहार और बाहर देश की सुन पाया।
प्रात: की चाय। थोड़ा सत्तू। दिन में पूरा दूध का भोजन और विश्राम।
दिन होने के कारण आज चैन है। खतरा मंडरा रहा है। अपना घर के उत्तर की सडक़, प्रमुख जी का बगीचा ढाल का काम कर रहा। इसके उत्तर का पहले का निर्माण। पूरब से बोरिंग की भाीसी बचाव भी काकारण है। पोर्टिको के पूरब से अनवरत उत्तर से पानी वेग से भाग रहा है। अभी का यही आकलन है। बिजली नहीं है। रात अंधेरे में बीतेगी।
ऊपरी बेला पानी का नजारा देखने छत पर गया। बिन्देश्वरी सपरिवार, बेटी-दामाद लेकर पनाह में आ गए। कैसे उनकी पिछली रात कटी थी।
कुछ पढ़ा-लिखा। एक कविता हिंदी दिवस की प्रति साफ की। कुछ अखबारों को फोटो कराके भेजने के लिए। अपने घर के पूरब से पानी वेग में, दक्खिन की ओर। बाद में पोर्टिको के बरामदे के भीतर से भी पानी निकल रहा है तेज धार बनकर। यह गनीमत है। घर में पानी फिल्ली भर है। धीरे-धीरे बढ़ रहा है। आसन्न खतरे के मद्देनजर सावधानियां बरती गई हैं। दीवान खाली किया गया। किताबें, फाइल, ऊपर के रैक पर रखवाया।
संध्या का आगमन। कुछ पढ़ा। अखण्ड ज्योति का एक लेख अवश्य पढ़ लेना चाहिए। दीवान पर ही समय, अधिकांश समय। ट्रांजिस्टर मेरे जीने का आधार, देश-दुनिया से अवगत होता रहा। रात बरसा नहीं हुई। ऊपर-नीचे सभी घोड़ा बेच कर सोने जैसा -चैन से सोए। मैंने भी घर के भीतर का पानी घटते देखा।
भगवान बचावें। त्राहिमाम .... त्राहिमाम

Saturday, September 27, 2008

कोसी की बाढ़:कुशहा का बांध टूटना

अभूतपूर्व घटना
कुशहा का बांध टूटना
पूर्व की भांति आश्वस्त था कि वीरपुर को कुछ नहीं होगा। घर पक्का है,यही दीठ बनाये रखा। बगल के रामजी यादव का पूरा परिवार हमारे जीवन-मरण में खड़ा रहता है। उन्होंने अपने घर के सामान को सुरक्षित कर लिया। वे रात में अपने बाल-बच्चों समेत मेरे घर पनाह लेने आ गए। अगल-बगल के परिचित परिवार और बच्चे का पनाह लेने आ गए।
दुल्हिन ने सबों को छत पर भेज दिया। हम दोनों और बेटा-बहू, अभी भी अपने को सुरक्षित समझते हुए, सामान को रैकों पर और दीवान के ऊपर रखना शुरू किया।
त्राहिमाम त्राहिमाम, दिलों में दहशत, फिर भी निर्भीकता, अपने पक्के मकान का फख्र, सैकड़ों परिचितों के बाल-बच्चों की जान बची। दीवान पर मैं सो गया, एक तरफ पत्नी, बीच में किसू सो गए।
अजय को जानकारी दी। उस समय पानी से घिर गए थे। रंजन को खबर नहीं हुई। राजू को खबर हो गई। अद्र्ध नींद में, घड़ी पर नजर बार-बार। सुबह कुछ राम नाम,फिर गायत्री मंत्र का जाप। सुबह हुई। राहत की सांस।
मुशर्रफ का नव वर्ष से कछ महीने पहले गद्दी छोडक़र इस्तीफा देना, खुशियां पाकिस्तान में हर कूचे और गली में, तथा अवाम ने राहत की सांस ली।
पर जम्मू कश्मीर के नौजवानों ने फिर एक बार अलग होने का बिगुल बजाया है। भाजपा का हिंदू आंदोलन भी जम्मू में फिरकापरस्ती को आहुति दे रहा है। विस्फोटक स्थिति बनी है।

Friday, March 7, 2008

'मझधार' के लोकार्पण का आमंत्रण,९ मार्च

अगर आप पटना में रहते हैं तो ९ मार्च को समय निकालिए और मेरी नई पुस्तक 'मझधार' के लोकार्पण समरोह में आइये.मैं चाहता हूँ की इंटरनेट के जरिये मुझे जानने वाले मित्र इस समरोह में जरूर आयें.लोकार्पण समरोह सिन्हा लाइब्रेरी में ४ बजे निश्चित किया गया है.इस समरोह की अध्यक्षता श्री नृपेन्द्र नाथ गुप्त करेंगे.लोकार्पण दूरदर्शन के निदेशक शशांक के हाथों होगा.आपकी उपस्थिति से मुझे बढावा मिलेगा।
'मझधार' मेरा तीसरा कहानी संग्रह है.इसमें बारह छोटी-बड़ी कहानियाँ संकलित हैं.अधिकांश कहनियाँ विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं.मैं देश,दुनिया,समाज,घर,परिवार के बीच में जीवन बसर कर रहा हूँ.ये कहानियाँ उन्हीं के बीच से आई हैं.कहानियो के पात्रों के साथ मेरा तादात्म्य है.प्रच्छन्न रूप से मेरी आत्मीयता हर पात्र के साथ रहती है।
माँ का जैसा प्यार और लगाव अपनी संतान से होता है,ठीक वैसा ही मेरा लगाव अपने पात्रों के साथ रहता है.कुम्हार बर्तन बनाता है.कोई टेढ़ा-मेढ़ा भी हो जाता है.उसी प्रकार मेरी हर कहानी एक सांचे में ढली नहीं है,उनमें भिन्नता आपको मिलेगी.

Tuesday, March 4, 2008

भारत का भविष्य

एल ओ सी के दोनों ओर
कश्मीरी अवाम
दीवारें तोड़ने को तैयार
गले-गले मिलने को बेताब
पर
बचे-खुचे
चरमपंथी/दहशतगर्द
बस को/क्या चैन से
चलने देगे।
* * *
कश्मीर एक मसला है
पाकिस्तानी हुक्मरानों का
जो इसे अलग कर/रखना चाहते हैं
अमेरिका को एफ १६ विमान
दूसरी ओर एफ १८ विमान का पेशकश
क्या
अणु परमाणु मिसाइल के ज़माने में
यही सब होता रहेगा
क्या अमेरिका दिल से चाहता है
भारत एक विकसित देश बने
एशिया का सरताज बने
विश्व बाज़ार में जमे/यू एन ओ के
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वीटो पावर के साथ.