सच कहता हूँ
नियति में जो बदा था
वह भरपूर मिला
अभी जिन्दा हूं
जाने के आसार नहीं हैं
आकांक्षाएं जाती नहीं
मैं क्या करूं?
काम करता हूं
आपको जलन क्यों होता है?
बूढ़ा भले ही हो गया हूं
महाबूढ़ा नब्बे के दशक का
मेरे प्रति कलुष भावना नहीं रखें।
कुछ कर दिखाऊंगाा
तब दांतों तले अंगुली दबाएंगे
मैं इतराता नहीं हूं।
सच कहता हूं।
- गांव से
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Tuesday, November 30, 2010
Monday, August 9, 2010
तितलियां
रंग-विरंगी तितलियों पर
बचपन में जब नजर जाती थी
दौड़ पड़ता था पकड़ने को
एक मनोहारी तितली को पकड़कर
घर लाता था ‘धागा’ में
उसे बांध कर
उड़ाया करता था।
हाथ से धागा छूटा
तितली अपने संगियों को
खोज लेती थी।
रानी तितली की अदालत में
मुझे पेश होना पड़ा
गलती कबूल कर, उल्टे पांव उस दिन
भाग आया था।
मां को जताया नहीं था
आप पोर्टिकों में बैठा हूं
घर में बजती टीवी की आवाज
कानों तक आ रही है, सामने उजली
तितली की एक जोड़ी आती-जाती है
उनसे पूछता हूं, तुम्हारे संगी साथ
कहां हैं? तितली की जोड़ी रोने लगती है।
- गांव से
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